Jan 6, 2026

प्रेम


सर्दी में सूरज की किरणें,

तन को खूब लुभाती है।

गगन में चमके चन्द्रमा,

सबका मन हरसाती है।।

प्रेम लुटाओ परिवार में,

सदा खुशहाली रहती है।

कल-कल बहती नदियाँ,

हर क्षण यही बताती है।। 

रिश्ते खूब निभाओ जग में,

इससे अद्वितीय हरियाली रहती है।

जीवन है अनमोल रतन,

वसुधैव कुटुम्बकम् सिखलाती है।।

Nov 12, 2025

गौरव का आह्वान

हमारा भारत,

कण-कण में 

भरा अध्यात्म।

हमारी विरासत,

ज्ञान का सागर। 

हमने देखी 

सदियों की गुलामी।

पर ना हम टूटे, 

ना हम झुके। 

वैदिक काल का

ट्टषि मुनियों का भारत।

धर्म और अध्यात्म का 

जब होता रहा शंखनाद।

राम कृष्ण की धरती

बुद्ध महावीर नानक की धरती।

दुनिया देखे अद्वितीय, 

आज का युवा भारत,  

विशाल भारत।

Nov 11, 2025

अद्वितीय दुनिया में



जीवन अनमोल,

हरसाती है बहलाती है।

प्रेम दया दिखाओ जग में,

इससे खुशहाली बढ़ती जाती है।।

इंद्रधनुष के सात रंग,

सबका मन हरसाती है।

बाल गोपाल की मीठी बोली,

सब को खूब लुभाती है।।

बड़े-बूढ़ों को सम्मान देना,

संस्कार यही सिखाता है। 

माता पिता हैं देव समान

सनातन यही बताता है।। 

अच्छाई का वृक्ष लगाओ,

सुख-चैन का फल पाओगे।

इस अद्भुत अद्वितीय दुनिया में

जीवन सार्थक कर पाओगे।

Nov 8, 2025

बहुत दूर हो गये

 वह पल साथ था तुम्हारा

प्यार भरा. . . . . . . . . . . ।

अहसास आज भी है उसका

इकरार भरा. . . . . . . . . . .॥

उम्मीद अब भी है शेष

मिलेंगें हमतुम  . . . . . . .

होगा  प्यार हमारा - तुम्हारा॥ 

भर आई थी मेरी आँखें 

तुम्हारे दर्द का जब 

अहसास हुआ।

कितनी  दूर हो 

तुम मुझसे इसका 

मुझे पता मिल गया।

इतना नजदीक

         रह कर भी

हम आज

         बहुत दूर हो गये.........?

भर लिये आप

          दामन में खुशियाँ

मगर हम

          मजबूर रह गये........?

यादों के महल में

         क्या कोई फूल खिलेगा

हसरत हमारी

          वीरान कर गयें

इतना नजदीक

         रह कर भी

हम आज

         बहुत दूर हो गये.........?