Nov 7, 2025

युवा तुम वीर बनो



युवा तुम में धैर्य हो, लिये त्याग का सार।

हर राह तुम जीत कर, मिटा दो अंधियार।।

कार्य ऐसा तुम करो, हो जग में आलोक।

ध्वजा फहरे नाम का, विश्व के हर लोक।।

अपने तेज बल साहस से बन कर तुम वीर।

धैर्य संकल्प धीरज धर बने रहो गंभीर।।

विकट परिस्थितियों में भी रख मुस्कान।

युवा तुम्हारी जयकार हो बढ़े तुम्हारी शान।।

नित्यदिन करो प्रार्थना और स्तुति गान।

ईश्वर का आशीष मिले बढ़े अद्वितीय मान।।

Nov 5, 2025

स्वागत सर्दी



जब कोहरे से भरी सुबह

स्वागत करने लगे।

जब नर्म घासों पर चलकर 

ओसों की बूंदों से

पांव भींगने लगे।

जब धूप सुहानी लगने लगे। 

गर्म कपड़े भाने लगे। 

मूंगफली, गुड़, मटर, गाजर, 

देख मन ललचाने लगे।

दिन बड़ी जल्दी ढल जाने लगे।

शाम होते ही रात घिर जाने लगे।

गर्मा-गरम चाय काफी 

सूप का दौर जब चलने लगे।

मनभावन सर्दी का स्वागत 

हम सब अद्वितीय करने लगे।

बीते दिन

मानव मन, बीते दिनों को 

कहां भूल पाता है।

बचपन के दिन, जवानी की बातें

सब कुछ याद आता है।

बचपन का खेल अब भी उसे भाता है। 

बुढ़ापे की अवस्था, खेल नहीं पाता है।

जवानी के मित्रें को याद कर मुस्काता है

बीता हर एक लम्हा आंखों पे छा जाता है

पर अब जीवन की जिम्मेवारियों में 

खोया खोया रहता है।

नित दिन नई नई परेशानियों में

स्वयं को घिरा पाता है।

मानव मन, बीते दिनों को अद्वितीय 

कहां भूल पाता है।

Sep 4, 2025

ऊंचाइयाें को छूने वाले

बादलों के संग

छोड़ कर उड़ना,

कुछ क्षणों के लिए 

जमीं पे उतर आ,

धरती मां का ले कर आशीष, 

फिर ऊंचाइयाें को छू ले।

जानता है तू,

उड़ कर बहुत देर बाद,

उतरना तो होगा,

इसी धरती माता के अंक में तुझे।

ऊंचाइयाें को छूने वाले

कभी अपनी जमीं को

नहीं भूलते। 

सीख लिया इस सीख को जिसने,

अटल लक्ष्य पर रहता है।

आगे जाकर वही अद्वितीय

महान कहलाता है।।